Wednesday, May 7, 2014

ज़िन्दगी इम्तेहान लेती है

सुना है ज़िन्दगी इम्तेहान लेती है फराज,

पर यहाँ तो इम्तेहनों ने ज़िन्दगी लेली !!

अंजाम बुरा होता है.

हम तो आगाज ऐ मोहब्बत में ही लुट गए फराज,

और लोग कहते है अंजाम बुरा होता है.!!

शौक ऐ मुहब्बत

अजीब लोग बसते है तेरे शहर में मोहसिन,

शौक ऐ मुहब्बत भी रखते है और याद भी नहीं किया करते !!

गुज़र गया है ज़माना

फिर आज अश्क से आँखों में क्यों है आये हुए ,

गुज़र गया है ज़माना तुझे भुलाये हुए !

उम्र भर नहीं आया

तमाम उम्र उसी के इंतज़ार में गुजारी फराज,

मेरा ख्याल जिसे उम्र भर नहीं आया !!

शौक-ऐ-सफ़र

है शौक-ऐ-सफ़र ऐसा के एक मुद्दत से हमने 

मंजिल भी नहीं पायी, और रास्ता भी नहीं बदला!!

उन्हें गुरूर आ गया


कसूर नहीं इस में कुछ भी उनका फ़राज़,

हमारी चाहत ही इतनी थी के उन्हें गुरूर आ गया !!

Thursday, April 24, 2014

भूल जाना

भूल जाना जिसे आजतक ,नामुमकिन समझे बैठे थे हम 

वो शख्स आज मिला भी तो ,हमें पहचाना ही नहीं उस ने

मधु गजाधर

Wednesday, April 16, 2014

आज वो काबिल हुए

आज वो काबिल हुए,
जो कभी काबिल ना थे...

और
मंज़िलें उनको मिली,
जो दौड़ में शामिल ना थे...!!!
अमीर तो हम भी थे दोस्तों,
बस दौलत सिर्फ दिल की थी...
खर्च तो बहुत किया,
पर गिनती सिर्फ सिक्कों की हुई..

Tuesday, April 15, 2014

ये जो मेरे क़ब्र पे रोते है.......

ये जो मेरे क़ब्र पे रोते है.......

अभी उठ जाऊँ ..तो जीने ना दे.............,

बहुत महंगी पड़ेगी तुझे दुश्मनी मेरी

हमारा दुश्मन हमसे बोला
"बहुत महंगी पड़ेगी तुझे दुश्मनी मेरी"
हमने उसको उत्तर ये दिया कि
"सस्ती चीज हम कभी खरीदते ही नहीं"

मेरे लफ्जों को समझो

ख्वाहिश बस इतनी सी है की तुम मेरे लफ्जों को समझो,
आरजू ये नहीं की लोग वाह वाह करे..

किश्तो में ख़ुदकुशी का मज़ा

एक पल में एक सदी का मज़ा हमसे पूछिए ...
दो दिन की ज़िन्दगी का मज़ा हमसे पूछिए...
भूले है रफ़्ता-रफ़्ता उन्हे मुद्दतो में हम...
किश्तो में ख़ुदकुशी का मज़ा हमसे पूछिए

Sunday, March 23, 2014

वफा के वादे

हर कोई तेरे आशियाने का पता पूछता है, 

न जाने किस किस से वफा के वादे किये हैं तूने..!!

Wednesday, March 5, 2014

तेरे दिल में नहीं तो कहीं भी नहीं

मुझे ना ढूंढ ज़मीन-ओ-आसमां की गर्दिशों में, 

मैं अगर तेरे दिल में नहीं तो कहीं भी नहीं..!!

Saturday, March 1, 2014

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी एक चाहत का सिलसिला है,

कोई मिल जाता है कोई बिछड़ जाता है,

जिसे माँगते है अपनी दुआओं में,

वो किसी और को बिना मांगे मिल जाता है ...


बारिशों से दोस्ती

इन बारिशों से दोस्ती अच्छी नहीं फ़राज़,

कच्चा तेरा मकान है, कुछ तो ख्याल कर...

फैसला

मुझको रुकना था उसे जाना था अगले मोड़ तक, 

फैसला ये उसके मेरे दरमियाँ होना ही था ...

Wednesday, February 26, 2014

वोह अल्फ़ाज़ ही क्या

वोह अल्फ़ाज़ ही क्या, जो समझानें पडे

हमने मुहब्बत की है, कोई वकालत नहीं ....!!

Thursday, February 20, 2014

कुछ इस तरह से आओ..

कुछ इस तरह से आओ मेरे हाथों की लकीरों में, 

मुझे ऐसा लगे कि मेरी तकदीर बदलने वाली है..!!